रामचरितमानस की कुछ पंक्तियों की आधुनिक व्याख्या

रामचरितमानस की कुछ पंक्तियों की आधुनिक व्याख्या

गोस्वामी तुलसीदास की रामचरितमानस के किष्किन्धाकाण्ड की यह पंक्तियाँ मेरी पसंदीदा हैं

इनकी मैंने निजी व्याख्या आजके भारत के सन्दर्भ में की है

कहइ रीछपति सुनु हनुमाना। का चुप साधि रहेहु बलवाना।।

पवन तनय बल पवन समाना। बुधि बिबेक बिग्यान निधाना।।

कवन सो काज कठिन जग माहीं। जो नहिं होइ तात तुम्ह पाहीं।।

राम काज लगि तब अवतारा। सुनतहिं भयउ पर्वताकारा।।

कनक बरन तन तेज बिराजा। मानहु अपर गिरिन्ह कर राजा।।

सिंहनाद करि बारहिं बारा। लीलहीं नाषउँ जलनिधि खारा।।

सहित सहाय रावनहि मारी। आनउँ इहाँ त्रिकूट उपारी।।

जामवंत मैं पूँछउँ तोही। उचित सिखावनु दीजहु मोही।।

एतना करहु तात तुम्ह जाई। सीतहि देखि कहहु सुधि आई।

इसका सन्दर्भ उस समय का है जब रामचन्द्रजी की सेना समुद्र तक पहुँच गयी और समुद्र पार करके किसी को सीताजी की खोज में लंका जाना था I सब ने अपनी असमर्थता व्यक्त की I बुद्धिमान रीछपति जाम्बवंतजी समझ गए कि यह काम केवल हनुमानजी कर सकते हैं I

उस समय हनुमानजी चुप चाप ध्यान में अकेले एक टीले पर बैठे थे I जाम्बवंतजी उनके पास जा कर बोले कि हनुमानजी यह क्या आप चुप चाप बैठे हैं ?

अर्थात जब कर्म करने समय आता है देशभक्त को चुप नहीं बैठना चाहिएI जाम्बवंतजी हनुमानजी को याद दिलाते हैं कि आप पवन के पुत्र हैं और आपमें पवन जैसी शक्ति है I जब आंधी तूफ़ान चलता है तब बड़े बड़े पेड़ों को भी उखाड़ फेकता है I

इसके साथ हनुमानजी ज्ञानी और विवेकयुक्त भी हैं ( जैसा देशभक्त को होना चाहिए ) I कोई ऐसा काम दुनिया का नहीं है जो वह नहीं कर सकते हैं I उनका अवतार रामचन्द्रजी की सेवा करने के लिए हुआ है I

अर्थात देशभक्तों का जन्म देश की सेवा करने के लिए होता है ( राम का यहां अर्थ भारत की जनता समझना चाहिए ) I यह सुनते ही हनुमानजी का शरीर बड़ा होने लगा और पर्वत जितना बड़ा हो गया और वह सोने जैसे चमकने लगा I

अर्थात देशभक्त जब देश की सेवा करने लगते हैं तो वह विख्यात और महान हो जाते हैं I

हनुमानजी शेर जैसे चिंघाडने लगे कि मैं समुद्र को पार कर जाऊँगा या उसे निगल जाऊँगा I

अर्थात देशभक्त किसी विपत्ति से नहीं डरता है I ]

परन्तु हनुमानजी में विनम्रता भी है घमंड नहीं I वह जाम्बवंतजी से कहते हैं कि हे जाम्बवंतजी मुझे अच्छी राय दीजिये कि मैं क्या करूँ ?

अर्थात देश भक्त को कभी घमंड नहीं होना चाहिए और दूसरों से राय लेनी चाहिए I

तब जाम्बवंतजी बोले कि हे हनुमानजी आप इतना ही कीजिये कि लंका जाकर सीताजी का हाल मालूम करके आ जाइये I

अर्थात इंसान को अपनी सीमा में रहना चाहिएI हनुमानजी आसानी से सीताजी को लंका से ला सकते थे पर यह काम श्रीराम का था I अर्थात देशभक्त कितना ही बलवान क्यों न हो उसे अपने दायरे में रहना चाहिए और यह न समझना चाहिए कि वह कुछ भी कर सकता है I

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